January 27, 2026

Naval Times News

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एकलव्य विश्वविद्यालय में दस दिवसीय श्रीमद्भगवद्गीता शिक्षण का हुआ समापन

दमोह,म०प्र०:  योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एकलव्य विश्वविद्यालय में दस दिवसीय श्रीमद्भगवद्गीता शिक्षण का आज समापन हो गया।

पिछले कई दिनों से योग विज्ञान विभाग में संचालित श्रीमद्भगवद्गीता पर विशिष्ट व्याख्यान अनेकानेक विद्वानों द्वारा संपन्न हुआ ।

मुख्य वक्ता श्री मनीष चैतन्य जी महाराज जी ने श्रीमद्भगवद्गीता का सार रूपी मक्खन को समाज में परोसा है और यह स्पष्ट कर दिया कि श्री भगवानुवाच श्रीमद्भगवद्गीता में यत्र तत्र उपलब्ध होता है उन सभी लोगों को यदि आज का समाज याद करता है और उसका यदि अनुपालन करता है तो सहज ही त्रिविध ताप नाना प्रकार के दु:खों से निवृत्ति संभव है।

 

श्री चैतन्य महाराज जी ने यह भी स्पष्ट किया की सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज अर्थात् सभी धर्मों में मैं श्रेष्ठ स्वयं अपने भक्तों को श्रेष्ठ बताते हुए भक्तों के द्वारा भक्त ही यदि प्रचार करता है धर्म का तो वह धर्म समाज में पालनार्थ हेतु अग्रसर होता है । भगवान कहते हैं कि यदि तुम्हारी भक्ति केवल मुझ में है तो कहीं और कोई भक्ति करने की आवश्यकता नहीं है।

गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से सहज ही जिसकी अभी हम कल्पना नहीं किए हैं वह भी प्राप्त हो जाता है। भगवान यह स्पष्ट कहते हैं कि यदि आप मुझ में भक्ति करते हैं समर्पण की भावना रखते हैं तो आपकी सहायता के लिए मैं सदैव तत्पर रहता हूं ।

प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान संकाय की प्रमुख एवं दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष ने कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनूप कुमार मिश्र को श्रीमद्भगवद्गीता शिक्षण इस कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभाशीष प्रदान किया । ऐसे ही कार्यक्रम जिससे समाज को लाभ हो योजना बनाने की प्रेरणा दी। एवं चैतन्य महाराज जी का उद्बोधन समाज में प्रत्येक व्यक्ति को आत्मसात् करने की प्रेरणा दी।

श्रीमद्भगवद्गीता शिक्षण के मार्गदर्शक के रुप में माननीय कुलाधिपति डॉ सुधा मलैया माननीय कुलपति प्रोफ़ेसर पवन कुमार जैन कुलसचिव प्रोफेसर प्रफुल्ल शर्मा जी एवं विभाग के विभागाध्यक्ष सहायक प्राध्यापक श्रीमद्भगवद्गीता मैं उपस्थिति रही ‌।

डॉ. सारांश राजोरिया जी ने अट्ठारह अध्याय का पारायण करने हेतु सभी को प्रेरित किया क्योंकि निष्कर्ष अट्ठारहवें अध्याय में भगवान ने अर्जुन को यह बता दिया कि मैं ही श्रेष्ठ हूं तुम मुझ में भक्ति करो और यह तो तुम मुझ में भक्ति करते हो तो सहज ही है तो फिर भी देता को से मुक्त हो जाओगे। धन्यवाद ज्ञापन समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ.पवन कुमार शर्मा जी ने धन्यवाद किया संयोजक डॉ अनूप कुमार मिश्र ने सभी का अभिनंदन किया और सभी वक्ताओं को सम्मान किया ।

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