सुश्री चित्रा सिंह (चेतना) युवा कवयित्री हैं आप कोटा, राजस्थान से हैं, अंग्रेजी साहित्य में एमए है और बीएड कर रहीं हैं शिक्षक एवं कवि के रूप में समाज की सेवा करना चाहती है।
9 मार्च अपने जन्मदिवस के अवसर पर चित्रा द्वारा रचित कविता एक नारी की व्यथा,
जिसे चाहा, वो कभी पाया नहीं
जो पाया, उसे मैनें चाहा नहीं
जो मिला, वो ख़ास नहीं था
जो ख़ास था, वो पास नहीं था
जो पास था, वो अच्छा कहां था
जो अच्छा था, वो सच्चा कहां था
जो सच्चा था, वो तो मिला ही नहीं
एक फूल था दिल में, जो कभी खिला ही नहीं
बस कुछ इसी कश्मकश में ज़िंदगी गुज़रती चली गई
और मैं….गिरती, उठती, संभलती और संवरती चली गई….
मगर हां कुछ ना कुछ तो कमी हैं ज़िंदगी में
सबकुछ होते हुए भी, थोड़ी नमी हैं ज़िंदगी में
खुशियां तो हैं मगर, तन्हाइयां भी हैं ज़िंदगी में….
और वो संतुष्टि ही है जो गुम कहीं हैं ज़िंदगी में….
वो कुछ तो हैं जो मैं कभी पा ना सकी
ज़िंदगी के उस मुकाम तक अभी तक मैं जा ना सकी
बस कुछ इसी कश्मकश में ज़िंदगी गुज़रती चली गई
और मैं गिरती उठती संभलती और संवरती चली गई।।
रचयिता- चित्रा सिंह(चेतना)
नवल टाइम्स की ओर से सुश्री चित्रा सिंह को उनके जन्मदिवस(9 मार्च) पर बहुत बहुत शुभकामनायें एवं बधाई


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