राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा में संस्कृत विभाग संस्कृत भारती कोटा महानगर के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण शिविरम् का शुभारम्भ हुआ। सर्वप्रथम माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्जवलन किया गया। प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में कम्प्यूटर तथा AI के लिए अंग्रेजी के साथ संस्कृत उपयुक्त भाषा है। खगोल शास्त्र एवं ज्योतिष सीखने के लिए संस्कृत सीखना आवश्यक है। मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार पंचोली, सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा, परिक्षेत्र कोटा ने छात्राओं को बताया कि संस्कृत ही समस्त भाषाओं की जननी है एवं समस्त वेद, ग्रंथ, उपनिषद् इत्यादि संस्कृत भाषा में रचित है। यदि आप संस्कृत संभाषण सीखते है तो अपनी संस्कृति के वाहक बनेगे।
मुख्य वक्ता संस्कृत भारती, कोटा के प्रमुख श्री सत्यनारायण गौतम एवं विशिष्ट अतिथि श्री ललित नामा, सहायक आचार्य संस्कृत, कार्यवाहक प्राचार्य, कनवास रहे।
श्री सत्यनारायण गौतम ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन करवाया जा रहा है। संस्कृत के बिना संस्कारों का विकास संभव नहीं है। संवाद द्वारा भाषा का विकास होता है और परस्पर संवाद से संस्कृत संभाषण सीख सकते हैं। कार्यक्रम में महाविद्यालय की वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की अध्यक्ष श्रीमती प्रेरणा शर्मा ने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा को समझना एवं आधुनिक ज्ञान में समन्वय करना नई शिक्षा नीति का लक्ष्य है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजमल मालव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. अनिता तम्बोली, श्रीमती मीरा गुप्ता, श्रीमती सपना कोतरा, डॉ. सोमवती शर्मा, डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. उमा बडोलिया, श्री संतोष कुमार मीना आदि संकाय सदस्य एवं विद्या संबल व्याख्याता श्री भूपेन्द्र कुमार एवं श्रीमती सुनीता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. राजमल मालव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।


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