March 28, 2026

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राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर व्याख्यान श्रृंखला आयोजित

चिन्यालीसौड़: राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में 27 मार्च 2026 को बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विषय पर व्याख्यान श्रृंखला पांचवें व्याख्यान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

इस कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के आईपीआर प्रकोष्ठ एवं आइक्यूएसी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जो कि यूकास्ट, देहरादून द्वारा प्रायोजित रही। कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी ने मुख्य वक्ता डॉ. डी. पी. उनियाल जी के प्रति आभार प्रकट किया और स्वागत करते हुए अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बौद्धिक संपदा अधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का आधार हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सृजनात्मक सोच, अनुसंधान क्षमता एवं नवाचार की भावना विकसित करना भी है। विद्यार्थियों को अपने विचारों, परियोजनाओं एवं शोध कार्यों को सुरक्षित रखने और उन्हें व्यावसायिक रूप देने के लिए आईपीआर की प्रक्रियाओं का ज्ञान होना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. डी. पी. उनियाल, संयुक्त निदेशक, यूकास्ट, देहरादून ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने “इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इनोवेशन प्रमोशन” विषय पर अपने व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि आईपीआर नवाचार को प्रोत्साहित करने, शोध कार्यों को संरक्षित करने तथा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पेटेंट, कॉपीराइट एवं अन्य आईपीआर माध्यमों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स और आईपीआर के अंतर्संबंध को भी समझाया।
कार्यक्रम की दूसरी वक्ता डॉ. रजनी चमोली, प्राध्यापिका, रसायन शास्त्र विभाग एवं आइक्यूएसी संयोजक ने “जीआइ टैग्स ऑफ उत्तराखंड: प्रिजर्विंग हेरिटेज एंड एनहांसिंग इकोनामी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

उन्होंने उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण में जीआइ टैग के महत्व पर बताया कि इससे केवल सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उत्पादों को पहचान मिलती है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
अंत में महाविद्यालय के आईपीआर प्रकोष्ठ के प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल ने आभार व्यक्त करते हुए सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन वाणिज्य विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सुगन्धा वर्मा द्वारा किया गया। तकनीकी सहयोग डॉ बृजेश चौहान, डॉ भूपेश चन्द्र पंत एवं डॉ आलोक बिजल्वाण ने दिया।

इस अवसर पर डॉ किशोर सिंह चौहान, डॉ विनीत कुमार, डॉ खुशपाल, डॉ यशवंत सिंह, डॉ निशि दुबे, डॉ प्रभात कुमार सिंह, डॉ आराधना राठौर, डॉ नेहा बिष्ट, डॉ मंजू पांडे, डॉ कुलवीर सिंह राणा, श्री राजेश राणा, श्री स्वर्ण सिंह, श्री मदन सिंह, श्री रोशन लाल, श्री होशियार सिंह, श्री जय प्रकाश भट्ट, श्री सुनील गैरोला, श्री अमीर सिंह चौहान, श्री सुनील रमोला, श्री नरेश रमोला, श्री कौशल सिंह बिष्ट, श्री धनराज सिंह बिष्ट, श्रीमती हिमानी रमोला, श्रीमती विजय लक्ष्मी, श्री संजय कुमार, श्री रमेश चंद्र एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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