कोटद्वार: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटद्वार में “मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत पोस्टर एवं मॉडल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम बी.एड. विभागाध्यक्ष एवं योजना के समन्वयक प्रो. रमेश सिंह चौहान के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा उन्हें पर्यावरणीय समस्याओं एवं उनके समाधानों के प्रति संवेदनशील बनाना था।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के लगभग 50 से 60 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जैव विविधता संरक्षण एवं स्वच्छ पर्यावरण जैसे विषयों पर आकर्षक पोस्टर, चार्ट एवं मॉडल तैयार किए। विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण संदेशों को रचनात्मक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
प्रतियोगिता के अंतर्गत विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी कक्षाओं में प्रदर्शनी (Exhibition) लगाई, जहाँ उन्होंने अपने पोस्टर, चार्ट एवं मॉडलों का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास के साथ अपने कार्यों का प्रस्तुतीकरण करते हुए उनके उद्देश्य, उपयोगिता एवं पर्यावरणीय महत्व को विस्तारपूर्वक समझाया।
प्रस्तुतीकरण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण प्रदूषण की वर्तमान चुनौतियों तथा उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला। उनकी रचनात्मकता, विषय की समझ एवं प्रस्तुतीकरण शैली ने सभी उपस्थित जनों को प्रभावित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. एस. नेगी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को सफल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं बी.एड. विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज एवं पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए पोस्टरों एवं मॉडलों की प्रशंसा की तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों में निरंतर सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में इतिहास विभाग के डॉ. जुनीश कुमार, डॉ. सुनीता नौटियाल, डॉ. डी. के. मौर्य उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों के पोस्टरों एवं मॉडलों का मूल्यांकन उनकी विषय-वस्तु, रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, पर्यावरणीय संदेश एवं नवीनता के आधार पर किया।
उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में शोध, नवाचार एवं सामाजिक चेतना का विकास करती हैं।
कार्यक्रम में डॉ. सुशील चन्द्र बहुगुणा, डॉ. सुषमा थपलियाल भट्ट, डॉ. सुनीता नौटियाल, डॉ. एस. के. आर्य, डॉ. डी. बी. सिंह तथा डॉ. डी. के. मौर्य भी उपस्थित रहे। सभी प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके द्वारा प्रस्तुत पोस्टरों एवं मॉडलों की सराहना की।
सम्पूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। इस आयोजन ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण कौशल एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया।
अंत में सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं उपस्थित प्राध्यापकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।


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