September 3, 2026

Naval Times News

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राजकीय महाविद्यालय कोटा में ‘लोक मंथन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन

  • लोक अैर शास्त्र के समन्वय की आवश्यकता- श्री विनय दीक्षित

देवेंद्र सक्सेना, कोटा: आज दिनांक 02 सितंबर 2026 को राजकीय महाविद्यालय कोटा के रामानुजन हाॅल में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) कोटा इकाई के तत्वावधान में ‘लोक मंथन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के अखिल भारतीय राष्ट्रीय सह संयोजक श्री विनय दीक्षित रहे।

इस अवसर पर मंच पर प्रो. एम एल साहू (एबीआरएसएम सेवा निवृत्त प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक), प्रो. आर.पी.सोमानी (एबीआरएसएम जिला उपाध्यक्ष) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. हेमलता गुप्ता ने की।

मुख्य वक्ता श्री विनय दीक्षित ने अपने उद्बोधन में लोक और शास्त्र तथा लोक और विज्ञान पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोक और शास्त्र एक दूसरे के पूरक है। औपनिवेशिक काल में पाश्चात्य संस्कृतिक ने लोक और शास्त्र को एक दूसरे के विरूद्ध खड़ा करने का काम किया है जिसके परिणाम स्वरूप लोक में व्याप्त परंपरा और ज्ञान धूमिल हुआ है।

आज लोक में व्याप्त वैज्ञानिकता को महत्व देना होगा, उसे समझना होगा। लोकगीत, लोक संस्कृति, लोक परंपरा, लोक चिकित्सा, लोक कला, लोक चिंतन, लोक साहित्य, लोक विश्वास, लोक जीवन आदि सभी हमारी विरासत है।

इसे पहचान कर समझना होगा। लोक में व्याप्त मूल्यवान विचार और ज्ञान को पहचानकर स्थापित करने की महती आवश्यकता है। अपने समय में तुलसी, कबीर, रैदास जी ने भी यही कार्य किया था। इस देश में रहने वाला हर ग्रामवासी, नगरवासी एवं वनवासी सभी भारतीय हैं।

उन्होंने हमारी प्राचीन ग्राम न्याय व्यवस्था के बारे में बताया कि उस समय लोगों के साथ पंचायत में डिसिजन न होकर न्याय होता था। विशिष्ट अतिथि प्रो. एम एल साहू ने कहा कि आज प्राचीन और अर्वाचीन के सामंजस्य की आवश्यकता है।

प्रो. प्रहलाद कुमार मीणा (एबीआरएसएम प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य) ने मंच संचालन किया तथा प्रज्ञा प्रवाह के कोटा महा नगर ंसयोजक प्रो. हरिशंकर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में कोटा जिले के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के एबीआरएसएम कार्यकर्ता, सदस्य एवं संकाय सदस्य संस्कार भारती संस्कृत भारती के कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।

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