January 21, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

हरिद्वार बीएचईएल: श्री राम जानकी कथा के तृतीय दिवस, भगवान श्री राम के जन्म उत्सव की कथा का हुआ वाचन

हरिद्वार,बीएचईएल ,7 जनवरी 2026: सनातन ज्ञान पीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल रानीपुर हरिद्वार प्रांगण में लगातार चली आ रही 57वी श्री राम जानकी कथा के तृतीय दिवस की कथा में परम पूज्य आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज जी ने अत्यंत भावपूर्ण और महत्वपूर्ण श्री राम जानकी कथा मे राम भक्तो को भगवान श्री राम के जन्म उत्सव की कथा सुनाई। श्री राम जन्म की कथा भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का सबसे पावन प्रसंग है।

कथा व्यास जी ने कहा कि भगवान के जन्म के अनेक कारण है भगवान पृथ्वी पर इसलिए नहीं आते की उनको राक्षसों को मारना है बल्कि यह कार्य तो ईश्वर अपनी इच्छा मात्र से भी कर सकते है।लेकिन भगवान को अपना भगत प्रिय होता है अतः भक्तों के दर्शन के लिए साधु महात्माओं का यज्ञ देखने के लिए उनसे आशीर्वाद पाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होते है।

कथा व्यास जी ने बताया की अयोध्या के राजा दशरथ परम प्रतापी और धर्मात्मा थे लेकिन बुढ़ापा आने पर भी उनकी कोई संतान नहीं थी। वे अत्यंत दुखी होकर अपने गुरु वशिष्ठ जी के पास गये।गुरु वशिष्ठ जी ने राजा दशरथ जी को ढांढस बंधाया और बताया कि उनके आंगन में चार पुत्र खेलेंगे उन्होंने श्रृंगी ऋषि को बुलवाकर पुत्र कामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया।यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्निदेव जी हाथ में ‘चरु’ (दिव्य खीर) का पात्र लेकर प्रकट हुए।और उन्होंने वह पात्र राजा दशरथ को दिया।और उस प्रसाद को अपने तीनो रानियो को बाटने को बोला जिसके परिणाम स्वरूप जब नौ मास पूर्ण हुए, तब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को,दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में भगवान विष्णु प्रकट हुए।भगवान पहले अपने चतुर्भुज रूप (शंख, चक्र, गदा, पद्म युक्त) में माता कौशल्या के सामने आए। माता ने प्रार्थना की कि “प्रभु! मैं आपकी माता बनना चाहती हूँ, आप इस अलौकिक रूप को त्यागकर बालक बन जाइए।” प्रभु ने तुरंत शिशु रूप धारण किया और रुदन करने लगे।इस प्रकार राजा दशरथ के आंगन मे चार पुत्रो ने जन्म लिया।जैसे ही महल से बालक के जन्म की खबर बाहर आई, पूरी अयोध्या नगरी आनंद में डूब गई। गलियों में अबीर-गुलाल उड़ने लगा और घर-घर में मंगल गान होने लगे।आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की और गंधर्वों ने दिव्य संगीत बजाया।

कथा व्यास् जी ने बताया की ​राम का जन्म केवल एक राजा का जन्म नहीं था, बल्कि ‘मर्यादा’ का जन्म था।​भगवान का यह अवतार अधर्म का नाश करने और मनुष्य को मर्यादा में रहकर जीवन जीने की कला सिखाने के लिए था। राम जन्म की यह कथा सुनने मात्र से भक्त के हृदय में आनंद और शांति का संचार होता है भगवान के प्राकट्य की चर्चा करते हुए कथा व्यास जी ने कहा की जो भगवान का जन्मोत्सव राम नवमी के दिन अपने घर मे करता है या मनाता है उसका हमेशा मंगल हि होता है उसे अमंगल छु भी नहीं सकता।इसलिए भगवान राम का नाम मंगल भवन अमंगल हारी भी है। श्री राम जन्मोत्सव शिव मंदिर सेक्टर 1 मै श्रोताओ के साथ बड़ी हि धूम धाम के साथ मनाया गया।

कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायण त्रिपाठी,तेज प्रकाश,

अनिल चौहान,मानदाता,राकेश मालवीय,रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत,ऋषि,सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद दिनेश उपाध्याय,रामललित गुप्ता,रजनीश,अलका शर्मा,संतोष चौहान,पुष्पा गुप्ता,नीतू गुप्ता,अंजू पंत,अनपूर्णा,सुमन,विभा गौतम, बृजेलेश,दीपिका,कौशल्या,सरला शर्मा,राजकिशोरी मिश्रा,मनसा मिश्रा,सुनीता चौहान,बबिता,मीनाक्षी

और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

About The Author