October 30, 2026

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रुड़की के विद्या मंदिर में धनौरी पी.जी. कॉलेज का आउटरीच कार्यक्रम: विद्यार्थियों को दिया ‘साधारण से असाधारण’ बनने का मंत्र

धनौरी, हरिद्वार, 28 नवंबर 2026: योगी मंगलनाथ सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, रुड़की में धनौरी पी.जी. कॉलेज, हरिद्वार के आउटरीच प्रोग्राम के अंतर्गत एक विशेष विज्ञान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “IGNITE YOUR INNER POTENTIAL – THE JOURNEY FROM ORDINARY TO EXTRAORDINARY” (अपनी आंतरिक क्षमता को जागृत करें — साधारण से असाधारण बनने की यात्रा) विषय पर आधारित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

वरिष्ठ शिक्षाविदों ने साझा किया ज्ञान
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में धनौरी पी.जी. (शासकीय सहायता प्राप्त) महाविद्यालय, हरिद्वार के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) विजय कुमार उपस्थित रहे। उनके साथ डॉ. नीतू रानी तथा श्रीमती मोनिका मित्तल ने विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। वक्ताओं ने छात्रों को समझाया कि किस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प के बल पर एक साधारण विद्यार्थी भी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है।
प्रयोगात्मक उपकरणों और सिद्धांतों से कराया परिचय
इस आउटरीच कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान की प्रयोगशाला में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न आधुनिक उपकरणों के बारे में विस्तार से बताया गया। शिक्षकों व विशेषज्ञों ने उपकरणों के सही उपयोग, उनके उचित रखरखाव तथा प्रयोग (प्रैक्टिकल) करते समय बरती जाने वाली सावधानियों की व्यावहारिक जानकारी दी। इसके साथ ही, विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले महान वैज्ञानिकों, उनके आविष्कारों तथा उनसे जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों से भी विद्यार्थियों को रूबरू कराया गया।
वैज्ञानिक चेतना जगाने का निरंतर प्रयास
वक्ताओं ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे जिज्ञासु बनें, अपनी छिपी हुई आंतरिक क्षमताओं को पहचानें और निरंतर कड़े परिश्रम के माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें।
धनौरी पी.जी. कॉलेज द्वारा संचालित इस आउटरीच प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक रुचि विकसित करना और उनमें वैज्ञानिक चेतना का संचार करना है। इस सफल आयोजन से विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद मिली, जिससे वे भविष्य में विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुए।

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