लखनऊ: कल दिनांक 30 मार्च 2026 को न्यायालय श्रीमान विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट, लखनऊ द्वारा बहुचर्चित वाद “सरकार बनाम राजेश दत्त बाजपेई” में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त राजेश दत्त बाजपेई को बाईज्जत बरी कर दिया गया।
राजेश दत्त बाजपेई, जो कि भारतीय रेलवे में उच्च पद पर कार्यरत रहे हैं तथा पूर्व में रेलवे बोर्ड में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के उपरांत यह पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्री प्रांशु अग्रवाल, श्री सुमित यादव एवं श्री आशीष मिश्रा द्वारा तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर सशक्त एवं विधिक दृष्टि से ठोस बहस प्रस्तुत की गई। अधिवक्ताओं ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में मौजूद कमियों, विरोधाभासों एवं कानूनी त्रुटियों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि आपराधिक न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांतों के अनुसार अभियोजन का दायित्व होता है कि वह आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करे, जिसमें वह इस प्रकरण में विफल रहा। परिणामस्वरूप, साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया।
इस निर्णय के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं एवं संबंधित पक्षों में चर्चा का माहौल रहा। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि न्यायालय ने निष्पक्षता एवं विधिक सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय दिया है।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा था और आज आए इस फैसले ने इसे एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचा दिया।


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