हरिद्वार, 15 अगस्त 2026: श्री सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर समिति द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस की कथा मे कथा व्यास परम पूज्य आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी जी ने श्रद्धालुओं को शिव महापुराण कथा के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया।
महाराज श्री ने कहा कि कलियुग में शिव महापुराण का श्रवण जीव के दुखों, पापों और संतापों को दूर करने वाला अमोघ साधन है। यह कथा मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध कर उसे भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और शांति की ओर ले जाती है। भगवान शिव की महिमा और लीलाओं का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा शिव कृपा से सुख-शांति, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने चंचुला की पावन कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि चंचुला एक पुण्यात्मा स्त्री थी। पति की मृत्यु के पश्चात उसके जीवन में वैराग्य का भाव जागृत हुआ और उसने सांसारिक मोह-माया से मन हटाकर भगवान शिव की भक्ति का मार्ग अपना लिया। चंचुला ने श्रद्धापूर्वक शिव महापुराण की कथा का श्रवण किया। कथा के प्रभाव से उसके हृदय में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय हुआ तथा उसे अपने पूर्व कर्मों का बोध हुआ। इसके बाद उसने भगवान शिव की शरण ग्रहण कर अपना जीवन धर्म, भक्ति और सत्कर्मों को समर्पित कर दिया। उसकी अटूट श्रद्धा और शिव भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव की कृपा उस पर हुई और अंततः उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।महाराज श्री ने कहा कि चंचुला की कथा हमें संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और शिव महापुराण का श्रवण मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान, अशांति से शांति और बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है।
कथा के अंत में कथा व्यास जी ने शिव महापुराण कथा श्रवण के नियम एवं विधि भी बताई। उन्होंने कहा कि कथा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए श्रद्धा, संयम और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण करना चाहिए। मन को शांत एवं पवित्र रखते हुए यथासंभव सात्विक आहार का पालन करना चाहिए। कथा को केवल कहानी के रूप में न सुनकर उसमें छिपे आध्यात्मिक संदेशों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि कथा श्रवण के समय मन ही मन पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें। इससे मन की चंचलता दूर होती है और भगवान शिव के प्रति भक्ति एवं आस्था प्रगाढ़ होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से श्रद्धा एवं नियमपूर्वक शिव महापुराण कथा का श्रवण कर उसके संदेशों को अपने विचारों, व्यवहार और जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कथा के मुख्य यजमान जे.पी.अग्रवाल एवं पत्नी मंजू अग्रवाल,ब्रिजेश शर्मा,दिलीप गुप्ता,तेजप्रकाश,राकेश मालवीय,जय प्रकाश,अनिल चौहान,सुनील सुनील,मोहित शर्मा,मानदाता,हरि नारायण त्रिपाठी, मंगरे,अलका शर्मा,संतोष चौहान,पुष्पा गुप्ता,सरला शर्मा, अनपूर्णा, राजकिशोरी मिश्रा,सुमन,कुसुम गेरा,कौशल्या,मनसा मिश्रा,सुनीता चौहान एवं अनेको श्रद्धालु कथा के दौरान सम्मिलित रहे।


More Stories
महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में हर्षोल्लास से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस
गजा व निकटवर्ती क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, छात्र छात्राओं ने निकाली प्रभात फेरी
स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का सम्मान, डीएम मयूर दीक्षित ने कहा—इनके वंशजों की सेवा करना गौरव की बात