January 29, 2026

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कोटा: कला कन्या महाविद्यालय में “वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मुक्त व्यापार बनाम संरक्षण” विषय पर व्याख्यान आयोजित

आज दिनांक 25.07.2025 को अर्थशास्त्र विभाग के तत्वावधान में “वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मुक्त व्यापार बनाम संरक्षण” विषय पर एक विस्तार व्याख्यान आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुलश्रेष्ठ रहे। सर्वप्रथम विभागाध्यक्ष श्रीमती मीरा गुप्ता ने विषय प्रवर्तन करते हुए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर प्रकाश डाला।

वर्तमान में वैश्विक प्रतिस्पर्धा मात्र भौतिक संसाधनों के स्वामित्व के लिये ही नहीं अपितु सुदृढ़ व्यापार मानकों, प्रोटोकॉल्स एवं तकनीकी कुशलता में श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए है, इसलिए माइक्रोचिप्स, डेटा व एल्गोरिदम शक्ति के केन्द्र बन गये हैं।

मुक्त व्यापार बनाम संरक्षण की नई बहस आरम्भ हो गई है जहां विश्व व्यापार संगठन की महत्ता कम होती जा रही है। बहुपक्षीय व्यापार समझौता के स्थान पर द्विपक्षीय व्यापार समझौते किये जाने लगे हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. सुरेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने मुक्त व्यापार का अर्थ समझाया। संरक्षण नीति के उपकरण- आर्थिक व्यापार बाधाओं टैरिफ, कोटा, एम्बार्गो के बारे में बताया। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर सभी देश निर्यात बढाने, दवाओं व स्वास्थ्य टेक्सटाईल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी एवं मोबाइल बैटरी आदि क्षेत्रों में व्यापार शर्तों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिये प्रशुल्क दरों को संशोधित कर रहे हैं।

आपने रेखाचित्रों के माध्यम से प्रशुल्क एवं कोटा फिक्स करने के आर्थिक प्रभावों को समझाया। प्रशुल्क लगाने से घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिलता है, देश में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, आयातित वस्तुओं की मांग कम हो जाती है और अंततः देश का व्यापार संतुलन सुधर जाता है। WTO ने वर्ष 2025 से वैश्विक आय एवं व्यापार के घटने का अनुमान लगाया है।

मुक्त व्यापार क्षेत्र से होने वाले व्यापार सृजन एवं व्यापार दिशा परिवर्तन के बारे में विस्तार से समझाया। भारत us को लगभग 80 मिलियन डॉलर का निर्यात करते हैं जबकि EU को $52 विलियन का करते हैं। पिछले 10 वर्षों में चीनी आयातों पर निर्भरता कम हुई है जबक रूस से आयात बढ़े हैं। अमेरिका को हमारे सर्वाधिक निर्यात होते हैं। भारतीय विदेशी व्यापार के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं जैसे बढ़ता व्यापार घाटा, रूस-यूक्रेन युद्ध, दूसरे देशों द्वारा लगाये गये गैर प्रशुल्क बाधाएं, हरित व सुस्थिर व्यापार पर जोर आदि।

इन बाधाओं को पार करने के लिए कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात बढाना होगा, भारतीय डिजिटल नोलेज का प्रसार, डॉलर पर निर्भरता समाप्त करने के लिये रूपये में आयातों का भुगतान किया जाये आदि।

प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि अच्छी किताबें पढी जायें ताकि विषय की सही समझ विकसित हो सके। अर्थशास्त्र ऐसा विषय है जो हमारी दैनिक जीवन की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।

प्रायोगिक परीक्षाओं में सर्वाधिक प्रश्न इसी विषय से आते हैं। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. धर्मसिंह मीणा ने किया। डॉ. कविता मकवाना ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीता शर्मा ने किया। डॉ. सुनीता शर्मा ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र के विभिन्न टॉपिक को समसामयिक ज्ञान से अद्यतन करते रहना चाहिए।

कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य श्रीमती प्रेरणा शर्मा एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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