April 15, 2026

Naval Times News

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कोटा: तानाजी नगर स्वयं सेवक संघ की शाखा के तत्वाधान में मनाई भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर की 135वीं जयन्ती

देवेंद्र सक्सेना, कोटा:  तानाजी नगर स्वयं सेवक संघ की शाखा कोटा के तत्वाधान में लार्ड क्रष्णा स्कूल में भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर की 135वीं जयन्ति मनाई गयी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सीएल बैरवा सहायक कार्मिक अधिकारी कारखाना कोटा ने की तथा मुख्य वक्ता श्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा जी ,जिन पर विश्व हिन्दू परिषद के सहप्रान्त मंत्री चित्तौड़गढ़ प्रान्त का दायित्व है,ने बाबा साहब अंबेडकर के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

हाड़ा साहब ने बताया कि बाबा साहब का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि वह संघर्ष, समर्पण और सामाजिक न्याय की एक प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने अपने जीवन में असंख्य कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।

हाड़ा साहब ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के बचपन स्कूली शिक्षा पर चर्चा कर बताया कि उन्हें कक्षा में सबसे पीछे बैठाया जाता था। उन्हें अन्य बच्चों के साथ समान व्यवहार नहीं मिलता था। यहाँ तक कि उन्हें पानी पीने तक के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। यह केवल एक बालक के साथ अन्याय नहीं था, बल्कि उस समय की सामाजिक सोच का प्रतिबिंब था।सबसे पीड़ादायक बात यह थी कि उन्हें संस्कृत पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

कारण यह था कि कुछ लोगों को यह भय था कि यदि वे वेदों और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लेंगे, तो सामाजिक व्यवस्था पर प्रश्न उठेंगे। लेकिन इतिहास गवाह है— ज्ञान को कभी रोका नहीं जा सकता।बाबा साहब ने इन बाधाओं को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि और अधिक परिश्रम किया।

बाबा साहब ने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया कि—

“परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।”

मुख्य वक्ता महोदय ने अपने विचारों में यह भी उल्लेख किया कि बाबा साहब के मूल विचारों और उनके कार्यों को समाज के सामने पूरी तरह से प्रस्तुत नहीं किया गया। यह विषय चिंतन का है। हमें यह समझना होगा कि किसी भी महापुरुष को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उनके संपूर्ण योगदान के आधार पर देखना चाहिए।उन्हेंभारत रत्न सर्वोच्च सम्मान एक गैर-कांग्रेसी सरकार के समय प्रदान किया गया, जिससे यह संदेश भी जाता है कि बाबा साहब का व्यक्तित्व और कृतित्व किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं था।

हाड़ा साहब ने बताया कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके विचारों को सही संदर्भ में समझें और उन्हें राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के मार्गदर्शक के रूप में अपनाएं। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

बाबा साहब केवल एक वर्ग विशेष के नेता नहीं थे, बल्कि वे सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

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