- “भारत की प्रतिष्ठा द्वय- संस्कृत और संस्कृति”
कोटा /संस्कृतभारती कोटा महानगर और संस्कृत-विभाग राजकीय महाविद्यालय कोटा के संयुक्त तत्वावधान में 19, सितम्बर, 2026 को दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण शिविर का शुभारम्भ हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. गीताराम जी शर्मा(पूर्व सहायक निदेशक) मुख्य वक्ता प्रो. पूर्णचन्द्र जी उपाध्याय(प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय रामपुरा,कोटा) एवं अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. रोशन जी भारती ने की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो गीताराम शर्मा ने कहा कि संस्कृत संस्कृति का मूल है, ज्ञान विज्ञान का महासागर है तथा जीवन मूल्यों के सिद्धांत पक्ष और लोक व्यवहार दोनों की साधिका है।भारत की विश्व भर में प्रतिष्ठा का प्रधान कारण संस्कृत रही है ।
धर्म , अध्यात्म, समाज, संस्कृति, ज्ञान विज्ञान तकनीक तथा ज्ञान विज्ञान का ऐसा कोई आयाम नहीं जो संस्कृत भाषा में प्रकट नहीं हुआ हो। भारत का स्व और सर्वस्व उसकी संस्कृति और ज्ञान परम्परा है जिसकी प्रकाशिका संस्कृत है।यह आत्म बोध की भाषा है इसलिए जो अनेक भाषाएं जानता है, अनेक कला कौशल जानता है लेकिन यदि संस्कृत नहीं जानता वह स्वयं को भी नहीं जानता।
मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय रामपुरा कोटा के प्राचार्य प्रो पूर्णचंद्र उपाध्याय ने संस्कृत और संस्कृति की युति को भविष्य के भारत के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्कृत और संस्कृति भारत की प्रतिष्ठा हैं। संस्कृत न तो केवल कर्मकाण्ड मात्र की भाषा है और न किसी जाति वर्ग की भाषा है अपितु यह जन भाषा रही है , लम्बे समय तक यह भाषा आम लोगों की भाषा रही है।भाषा की दृष्टि से संस्कृत मधुर,सरल,सरस और मनोहारी है। संस्कृत पर कठिन होने का आरोप झूठ है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो रोशन भारती ने रोचक उदाहरणों से संस्कृत की वर्तमान प्रासंगिकता निरुपित की। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो मंजू जैन ने संस्कृत संभाषण शिविर की उपयोगिता निरुपित करते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। शिविर में प्रशिक्षक श्री आशुतोष गौतम ने संस्कृत संभाषण कौशल के प्रशिक्षण का प्रारंभ किया। संस्कृत भारती के चित्तोड़ प्रान्त संयोजक तथा संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ ललित नामा ने संचालन किया।इस अवसर पर संस्कृत विभाग के सभी संकाय सदस्यों तथा विभिन्न विभागों के अनेक शिक्षकों सहित
एम. ए. व बी.ए. संस्कृत के 35 विद्यार्थियों ने संस्कृत में सम्भाषण का अभ्यास किया। इस शिविर में आगामी दस दिन तक संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


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