January 30, 2026

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बादल फटना एक प्राकृतिक आपदा: भरत गिरी गोसाई

बादल फटना एक प्राकृतिक आपदा:

भरत गिरी गोसाई उत्तराखंड उच्च शिक्षा, वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ0 भरत गिरी गोसाई ने बादल फटना एक प्राकृतिक आपदा: कारण एवं बचाव विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि बादल फटने (Cloudburst) की घटना एक अत्यंत तीव्र और विनाशकारी प्राकृतिक प्रक्रिया है।

IMD के अनुसार अगर किसी क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 10 सेमी (100 मिलीमीटर) या उससे ज्यादा बारिश एक किलोमीटर के दायरे में होती है तो उसे क्लाउड बर्स्ट या बादल फटना कहा जाता है। यह आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में होता है, जैसे कि हिमालयी क्षेत्र, लेकिन अन्य जगहों पर भी संभव है।

बादल फटने के मुख्य कारण:

1. भूगोलिक स्थिति और पर्वतीय क्षेत्र:-* जब मॉनसूनी हवाएं या नमीयुक्त हवाएं पर्वतों से टकराती हैं, तो वे अचानक ऊपर की ओर उठती हैं। इस तेजी से ऊपर उठने के कारण वाष्पित जल ठंडा होकर भारी मात्रा में संघनित (condense) हो जाता है और अचानक तेज बारिश के रूप में गिरता है।

2. अत्यधिक नमी (High Moisture Content):- वायुमंडल में जब अत्यधिक नमी जमा हो जाती है और अचानक ठंडी हवा से टकराती है, तो वह तुरंत वर्षा में बदल जाती है।

3. स्थानीय वायुमंडलीय अस्थिरता:- जब एक ही स्थान पर गर्म और ठंडी हवाएं मिलती हैं, तो वातावरण अस्थिर हो जाता है। इससे बहुत तीव्र वर्षा हो सकती है, जो बादल फटने की वजह बनती है।

4. जलवायु परिवर्तन (Climate Change):-* बढ़ते तापमान के कारण वायुमंडल में नमी की मात्रा अधिक हो रही है। इससे बादल फटने जैसी चरम घटनाएं अधिक सामान्य होती जा रही हैं।

5. अन्य कारण:– वनों की कटाई, अतिक्रमण, और गलत निर्माण कार्य भी जल निकासी को बाधित करते हैं जिससे बादल फटने के बाद ज्यादा

भारत मे प्रमुख बादल फटने की घटनाएं:

1. केदारनाथ, उत्तराखंड

तिथि: 16-17 जून 2013

क्षेत्र: केदारनाथ, जिला: रुद्रप्रयाग

प्रभाव: भयंकर बाढ़ और भूस्खलन, 5,000+ लोगों की मृत्यु (अनुमान), हजारों लोग लापता, भारी संपत्ति और धार्मिक ढांचे का नुकसान। इसे “हिमालयी सुनामी” भी कहा गया।

2. लेह, लद्दाख

तिथि: 6 अगस्त 2010

प्रभाव: 200+ लोग मरे, 400+ घायल, घर, अस्पताल, सड़कों का विनाश।

3. धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश

तिथि: 12 जुलाई 2021

प्रभाव: भारी बारिश से सड़कें, वाहन बह गए, नदी-नाले उफान पर आ गए,20+ लोग मरे, पर्यटक और स्थानीय लोग फंसे।

4. अमरनाथ गुफा, जम्मू-कश्मीर

तिथि: 8 जुलाई 2022

प्रभाव: अमरनाथ यात्रा के दौरान बादल फटने से अचानक बाढ़ आई। 15+ यात्रियों की मृत्यु।

5. रामनगर, नैनीताल

तिथि: 18-19 अक्टूबर 2021

प्रभाव: भारी बारिश से कोसी नदी में बाढ़, कई पुल बह गए, पर्यटक और स्थानीय गांव प्रभावित हुए।

6. किन्नौर, हिमाचल

तिथि: जुलाई 2023

प्रभाव: अचानक बाढ़ और भूस्खलन, सड़कें, पुल, गांव ध्वस्त।

बादल फटने की स्थिति से कैसे बचें?

1. मौसम की जानकारी रखें:- यात्रा पर निकलने से पहले और दौरान IMD (भारतीय मौसम विभाग) या लोकल वेदर अपडेट्स जरूर चेक करें। रेड अलर्ट या भारी बारिश की चेतावनी हो तो यात्रा टाल दें।

 

2. खतरे वाले इलाकों से दूर रहें:– तेज बारिश के समय नदी किनारे, पुलों, पहाड़ी ढलानों और तंग घाटियों में न रुकें। ऐसे इलाकों में जल स्तर बहुत तेजी से बढ़ सकता है।

 

3. सुरक्षित स्थानों की पहचान करें:– पहाड़ों पर ट्रेक करते समय पास के शेल्टर, गुफा, पक्के भवन या ऊँचाई वाले स्थानों की जानकारी रखें।संकट में वही शरण स्थान बन सकते हैं।

 

4. यात्रा की जानकारी साझा करें:- ट्रेकिंग या यात्रा पर जाते समय अपने ग्रुप, गाइड, या परिवार को लोकेशन और प्लान जरूर बताएं। मोबाइल में GPS ट्रैकर, ऑफलाइन मैप्स और पावर बैंक रखें।

5. लाइट बैग और आवश्यक सामान रखें:- हमेशा हल्का और आवश्यक सामान रखें: रेनकोट / पॉन्चो, फर्स्ट ऐड किट, टॉर्च, सूखा भोजन, व्हिसल / सिटी आदि।

6. प्राकृतिक संकेतों को समझें:- बारिश के बाद अचानक तेज आवाजें आना, पेड़ हिलना, या जलस्तर बढ़ना, भूस्खलन या फ्लैश फ्लड के संकेत हो सकते हैं। तुरंत ऊँचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाएँ।

7. भीड़ या अफवाह से बचें:-संकट की स्थिति में घबराएं नहीं, संयम रखें। बिना पुष्टि अफवाहों पर न जाएं।प्रशासन और रेस्क्यू टीम के निर्देशों का पालन करें।

स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए सुझाव:

1. अधिक रडार और रेन गेज स्थापित किए जाएं।

2. जोखिम वाले क्षेत्रों की समय-समय पर जियो-टेक्निकल जांच हो।

3. यात्रियों के लिए SMS अलर्ट सिस्टम हो।

4. ट्रेकिंग और धार्मिक यात्राओं के लिए अनिवार्य पंजीकरण और गाइड की व्यवस्था हो।

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