- भारतीय संस्कृति, संस्कार और ज्ञान परंपरा ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति : प्रो. रमाकांत पांडे
हरिद्वार/धनौरी 24 जुलाई: धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “भारतीय गणतंत्र के 75 वर्ष : उपलब्धियाँ एवं चुनौतियाँ” विषय पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR–NRC), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के संपोषण में आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ गरिमामय वातावरण में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रो. रमाकांत पांडे, कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। तत्पश्चात भारतीय परंपरा के अनुरूप सभी अतिथियों को तुलसी का पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. रमाकांत पांडे ने भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं ज्ञान परंपरा को राष्ट्र की वास्तविक शक्ति बताते हुए युवाओं से भारतीय मूल्यों, संस्कृति एवं गुरु-परंपरा से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी, डीन, स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, श्री गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मातृभाषा, संस्कृति एवं शिक्षकों के सम्मान को विकसित भारत का आधार बताया।
मुख्य वक्ता प्रो. हेमलता मिश्रा, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं जनभागीदारी को सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।
विशिष्ट वक्ता प्रो. रमेश कुमार शर्मा, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़, दिल्ली ने भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा एवं भारतीय शिक्षा व्यवस्था की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मगौरव का आधार बताया।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़े मुख्य वक्ता प्रो. एम. एम. सेमवाल, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर ने भारतीय संविधान को लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं एवं लोकतांत्रिक परंपराओं ने भारत को विश्व के सशक्त राष्ट्रों में स्थापित किया है।
महाविद्यालय के सचिव श्री आदेश कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है तथा गणतंत्र के 75 वर्ष लोकतांत्रिक मूल्यों के आत्ममंथन का अवसर हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए संस्थान को ज्ञान का मंदिर बनाने का आह्वान किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ प्रतीक उपाध्याय , प्रो. अमित जायसवाल एवं डॉ. संजय कुमार पांडे ने भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वायत्तता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
अंत में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी के सचिव डॉ. गौरव कुमार मिश्रा ने आयोजन के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय मंच संचालन डॉ. कल्पना ने किया।


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