नैनीताल: पी.पी.जे. सरस्वती विहार, ज्योलीकोट (नैनीताल) में भारतीय शिक्षण मंडल, उत्तराखंड प्रांत द्वारा 30 एवं 31 मई 2026 को, दो दिवसीय परिचायक वर्ग-2026 का सफल आयोजन किया गया। वर्ग में प्रांत के विभिन्न जनपदों से आए 37 कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शिक्षण मंडल की विचारधारा, कार्यपद्धति एवं संगठनात्मक गतिविधियों से कार्यकर्ताओं का परिचय कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. तरुण कुमार सक्सेना द्वारा भारतीय शिक्षण मंडल के परिचय एवं परिचायक वर्ग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया गया। उन्होंने भारतीयता आधारित शिक्षा की आवश्यकता तथा वर्तमान शिक्षा परिदृश्य में भारतीय शिक्षण मंडल की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रथम सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय युवा प्रमुख डॉ. अमित रावत ने “भारतीय शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा में भारतीयता” विषय पर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा मूल्य आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
द्वितीय दिवस (31 मई) का शुभारंभ प्रातः जागरण, एकात्मता स्तोत्र एवं योग साधना के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझा तथा स्वयं को दिनभर के कार्यक्रमों के लिए ऊर्जावान बनाया।
द्वितीय सत्र में प्रो. सुमित्रा कुकरेती ने संगठन के कार्य, कार्यक्रम, गतिविधियों एवं विभिन्न कार्यविभागों की विस्तृत जानकारी दी।
तृतीय सत्र में प्रो. कुकरेती ने भारतीय शिक्षण मंडल के छह उत्सवों, कार्यकर्ता विकास की 2+2+2+2 अवधारणा, मंडल संकल्पना (5+5+5+5+5) तथा अध्ययन समूहों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
चतुर्थ सत्र में डॉ. अतुल मिश्र, डॉ. तरुण कुमार सक्सेना, डॉ. आशीष उपाध्याय एवं डॉ. अर्जुन बिष्ट ने प्रत्यक्ष मंडल का संचालन किया। मंडल चर्चा का विषय “विद्यार्थियों को मूल्यवान कैसे बनाएं” रहा।
चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभाव, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता एवं जीवन मूल्यों के विकास के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न होकर मूल्यनिष्ठ, चरित्रवान एवं राष्ट्रहितैषी नागरिकों का निर्माण होना चाहिए।
इसके उपरांत आयोजित मूक चर्चा का संचालन डॉ. अमित रावत एवं प्रो. सुमित्रा कुकरेती द्वारा किया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर चिंतन-मनन करते हुए अपने विचार साझा किए तथा जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
पंचम एवं समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. सूर्य प्रकाश, प्रधानाचार्य, पी.पी.जे. सरस्वती विहार, ज्योलीकोट ने की।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. बी.एस. बिष्ट, माननीय प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तराखंड ने भारतीयता आधारित शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारवान, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं शिक्षाविदों का आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जीवन मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी रूप से स्थापित करने हेतु सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का संचालन क्रमशः डॉ. तरुण कुमार सक्सेना, डॉ. अतुल मिश्र एवं श्री विजय द्वारा किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा के संवर्धन तथा भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय परिचायक वर्ग का सफल समापन हुआ।


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