हरिद्वार: पीएमश्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, मुण्डाखेड़ा कलां, लक्सर, हरिद्वार में आयोजित सात दिवसीय भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का समापन आज उत्साह, उल्लास, प्रेरणा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
शिविर के सप्तम एवं अंतिम दिवस की मुख्य गतिविधि “पारंपरिक खेल, प्रेरणा एवं शिविर का समापन” रही। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना समूह गान एवं राष्ट्रगान से किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विभिन्न पारंपरिक खेलों में भाग लिया, अपने अनुभव साझा किए तथा पूरे शिविर के दौरान अर्जित ज्ञान और अनुभवों का पुनरावलोकन किया।
भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन विद्यार्थियों में भाषाई दक्षता, सांस्कृतिक समझ, रचनात्मकता, सामाजिक मूल्यों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से किया गया था। सात दिनों तक आयोजित विविध गतिविधियों ने विद्यार्थियों को न केवल भाषा सीखने का अवसर प्रदान किया, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, इतिहास, भूगोल, स्वास्थ्य, कला तथा स्थानीय परंपराओं से भी जोड़ने का कार्य किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। समापन दिवस पर विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति में पारंपरिक खेलों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. संतोष कुमार चमोला ने बताया कि पारंपरिक खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शारीरिक विकास, मानसिक सजगता, टीम भावना, अनुशासन तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कबड्डी, खो-खो, पिट्ठू, रस्साकशी, लंगड़ी दौड़, गिल्ली-डंडा तथा अन्य पारंपरिक खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
खेल गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों में सहयोग, नेतृत्व, अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। विद्यालय परिसर आनंद, ऊर्जा और उत्साह से भर उठा तथा विद्यार्थियों ने खेलों के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीमवर्क का अनुभव प्राप्त किया। indoor स्थानीय गेम के रूप में अंताक्षरी वर्ड चैन, टंग ट्विस्टर, word association games आदि का आयोजन किया गया।
समापन समारोह के दौरान पूरे शिविर की गतिविधियों का विस्तृत पुनरावलोकन भी किया गया। विद्यार्थियों ने सात दिनों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिविर ने उनके ज्ञान, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
प्रथम दिवस : मूल अभिवादन, वर्णमाला एवं संख्या ज्ञान
शिविर के प्रथम दिवस विद्यार्थियों को Basic Greetings and Expressions, Alphabets तथा Numbering से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने हिंदी में अभिवादन, शिष्टाचारपूर्ण संवाद, वर्णमाला तथा संख्याओं का अभ्यास किया। विभिन्न संवाद गतिविधियों एवं खेल आधारित शिक्षण के माध्यम से उनकी भाषाई दक्षता और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।
द्वितीय दिवस : कला, संगीत एवं नृत्य
दूसरे दिन विद्यार्थियों ने कला, संगीत एवं नृत्य के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चित्रकला, समूह गायन और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति को नए आयाम देने का अवसर प्रदान किया। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना और सौंदर्यबोध का विकास किया।
तृतीय दिवस : वर्चुअल सिटी टूर
तीसरे दिन आयोजित वर्चुअल सिटी टूर के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत के विभिन्न शहरों, सांस्कृतिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों का डिजिटल भ्रमण किया। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को तकनीक आधारित अधिगम, भौगोलिक समझ और सांस्कृतिक विविधता के प्रति जागरूक बनाया।
चतुर्थ दिवस : स्थानीय भोजन, मसाले, फल एवं सब्जियाँ
चौथे दिन विद्यार्थियों को स्थानीय भोजन, मसालों, फल एवं सब्जियों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक खाद्य पदार्थों, पोषण, स्वास्थ्य और स्थानीय खाद्य संस्कृति के महत्व को समझा। इस गतिविधि ने उन्हें स्वस्थ जीवन शैली और स्थानीय विरासत से जोड़ने का कार्य किया।
पंचम दिवस : संस्कृति, स्थानीय नायक एवं स्वतंत्रता सेनानी
पाँचवें दिन विद्यार्थियों को स्थानीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, कलाकारों तथा सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी गई। प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के जीवन संघर्ष और योगदान को जानकर विद्यार्थियों में देशभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक गौरव की भावना विकसित हुई।
षष्ठम दिवस : इतिहास एवं भूगोल का ज्ञान
छठे दिन विद्यार्थियों ने नदियों, पर्वतों, ऐतिहासिक स्मारकों तथा भौगोलिक स्थलों के माध्यम से इतिहास एवं भूगोल का ज्ञान प्राप्त किया। मानचित्र, चित्रों और प्रश्नोत्तरी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व को समझा।
इन सभी गतिविधियों के अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों ने बताया कि शिविर ने उन्हें नई जानकारियाँ प्रदान करने के साथ-साथ आत्मविश्वास, संवाद कौशल और सांस्कृतिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समापन समारोह के दौरान प्रेरक सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्री संजीव कुमार ने विद्यार्थियों को जीवन में निरंतर सीखते रहने, अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने तथा समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि भारतीय भाषाएँ हमारी पहचान और संस्कृति की वाहक हैं तथा उनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की जिम्मेदारी है। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुभाष चंद त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास करती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को शिविर की सफलता के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चमोला के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने बताया कि शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों से जोड़ना था, जिसे विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने सफल बनाया।
शिविर के आयोजन एवं संचालन में श्री संजीव कुमार, श्री हरेंद्र रावत, श्री ब्रह्मपाल सिंह, मोहम्मद जावेद, श्री नौशाद, श्रीमती पूनम, सुनीता, गीता तथा महेंद्र सिंह ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी शिक्षकों एवं सहयोगियों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए प्रत्येक गतिविधि को प्रभावी, रोचक और शिक्षाप्रद बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सक्रिय सहभागिता के लिए प्रशंसा प्रदान की गई। सभी प्रतिभागियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की। उत्साह, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर वातावरण में भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का सफल समापन हुआ।
यह सात दिवसीय शिविर विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं, इतिहास, कला, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय मूल्यों को समझने की एक प्रेरणादायी यात्रा सिद्ध हुआ।
हरेंद्र सिंह रावत ने विश्वास व्यक्त किया कि शिविर से प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक जागरूकता और जीवनपर्यंत सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।


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