कोटा: हेट्रिक लगाकर आश्चर्यचकित करने वाले कुशल निदेशक डॉ0 विकास दवे से देवेंद्र कुमार सक्सेना (अध्यात्म समाज कला संस्कृति समाज सेवी कोटा) की तीन यादगार मुलाकातें …
1-हिमालय के समान विशाल, सागर” के समान गहरे व आकाश के समान अनंत व्यक्तित्व साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ0 विकास दवे से पहली दूसरी और तीसरी मुलाकात को संक्षिप्त में पाठकों से शेयर कर रहा हूं…
2025 में अभिनव कला परिषद द्वारा ‘अभिनव कला सम्मान,, प्राप्त करने के भोपाल गया था तब कई हस्तियों से मुलाकात हुई… सम्मान के दूसरे दिन उज्जैन के वरिष्ठ प्रो0 बुधौलिया व
केंद्रीय विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो0 वर्मा के साथ शुजालपुर में पढे अपने सहपाठी माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदरसिहंजी
परमार के यहां मिलने गया वहां आधा घंटे रूककर हम बुधौलिया सर के साथ मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ 0 विकास दवे के पास पहूँचे… उस समय वे नव नियुक्त सहायक निदेशक श्री शेखर कराडकर के स्वागत समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। उनका कार्यालय मध्य प्रदेश के कला और संस्कृति कर्मियों से खचाखच भरा हुआ था। उन्होेंने हमें व्यस्तता के बावजूद अतिथि देवो भव के भाव से अपने करीब आसन प्रदान किया।
वहॉं हो रही रोचक चर्चा गतिविधियों में मैं भी पूरे मन से शामिल हो गया।
मैं दवे जी के प्रखर विचार, व्यवहार- कुशलता, प्रशासनिक अनुभव से परिचित हो रहा था। उनके ज्ञान, लेखन, हिमालयी व्यक्तित्व से पहले से ही परिचित था किंतु उपस्थित सभी लोगों के प्रति उनका सद्भाव, उनका व्यवहार देखकर मन बहुत प्रसन्न हो रहा था।
इतने रत्न दिए हैं कैसे जिससे देश महान है।
भारत की परिवार व्यवस्था ही रत्नों की खान हैं।
वे संस्कार परिवार में जन्में व्यक्ति हैं
पता चला कि आपका संस्कारित परिवार संघ निष्ठ और गायत्री परिवार से जुड़ा हुआ है। संघ निष्ठ व्यक्ति तो कभी पद लोलुप नहीं होता है। केवल दिये गये दायित्व का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करता है। इसलिए उन्हें तीसरी बार दायित्व दिया गया।
प्रो0 बुधौलिया जी ने डा0 विकास जी से मेरा परिचय कराया कि मध्य प्रदेश में 1964 में जन्में देवेंद्र कुमार सक्सेना कोटा राजस्थान में संस्कार भारती के दायित्व सम्हाल रहे हैं आप आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक समरसता संगीत योग समाज सेवी के रूप में 50 वर्षों से लगातार निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं। गायत्री परिवार के मुखिया साथ आप अमेरिका कनाडा इंग्लैंड नेपाल आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं आदि..
भेट के बाद हम होटल कालिंदी लौट आये..
. कोटा लौट कर यदा कदा फोन पर संवाद हो जाता था
(2)दूसरी मुलाकात पुनः भोपाल में संस्कार भारती के राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में हुई (लेख के साथ फोटो उसी समय का है।) तब श्री विजय कुमार, प्रशिक्षक प्रमुख श्री अरूण कुमार शर्मा, पद्मश्री कपिल तिवारी, अभिनेता श्री राजीव वर्मा, प्रशिक्षक श्री मुकुल कानिटकर, उप निदेशक श्री शेखर कराडकर, श्री चन्द्र कांत शर्मा, कला समय पत्रिका के संपादक श्री भंवर लाल श्रीवास, धुरंधर फिल्म के अभिनेता श्री संजय मेहता, केरला स्टोरी के लेखक सूर्यपाल सिंह, तबला विद्वान डाॅ 0 गौरांग भावसार आदि कई कला संस्कृति साहित्य व राष्ट्र भक्तों से मुलाकात हुई।
कोटा लौटकर भी विकास जी, श्री अरूण कुमार शर्मा जी, श्री शेखर गौरांग जी भावसार आदि का सरस चुंबकीय व्यक्तित्व मन मष्तिष्क में छाया रहा…बीच बीच में उनसे संवाद होते रहे…
3- तीसरी मुलाकात भारतेंदु समिति कोटा के शताब्दी समारोह में 9 सितम्बर 2026 को हुई जब उन्हें लोकसभा अध्यक्ष श्रीमान ओम बिरला जी एवं समिति संरक्षक श्री राजेश कृष्ण बिरला जी के हाथों १०० वर्ष पूर्व कोटा में भारतेंदु समिति के संस्थापक श्री हनुमान प्रसाद सक्सेना के नाम का ” आचार्य हनुमान प्रसाद सक्सेना स्मृति अखिल भारतीय साहित्य संस्कृति सम्मान 2026,, प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि उसी दिन उन्हें मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल का तीसरी बार निदेशक बनाया गया।
यह हेट्रिक उनके कार्य के प्रति समर्पण, साहित्य के प्रति श्रध्दा, निष्ठा, प्रशासनिक पारदर्शिता, अनुशासन, न्याय प्रियता का परिणाम है।
उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्र स्तरीय आचार्य श्री हनुमान प्रसाद सक्सेना स्मृति अखिल भारतीय साहित्य संस्कृति सम्मान प्राप्त होने तथा तीसरी बार मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी निदेशक बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
देवेंद्र कुमार सक्सेना
अध्यात्म, कला संस्कृति मीडिया साहित्य प्रेमी, कोटा राजस्थान


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