October 27, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

श्रम कानूनों का पालन करने और श्रमिक नेताओं पर दर्ज मुकद्मे वापस लेने की संयुक्त मोर्चा ने उठाई मांग

संजीव शर्मा, नवल टाइम्स न्यूज़: संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, हरिद्वार, इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी, केंद्रीय परिषद सदस्य जय प्रकाश यादव तथा पीपल्स यूथ फ्रंट के ललित इंजीनियर को गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किए जाने की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

मोर्चा इसे मजदूर आंदोलन को कमजोर करने, मजदूरों की जायज मांगों को दबाने तथा संघर्षरत मजदूर नेताओं को डराने-धमकाने की कार्रवाई मानता है।

मोर्चा का कहना है कि मजदूर नेताओं के विरुद्ध फर्जी एवं कथित तौर पर मनगढंत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। ये नेता औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं और मजदूरों तथा प्रबंधन के बीच विवादों को सुलझाने के लिए श्रम विभाग की मध्यस्थता में हुई वार्ता एवं समझौता प्रक्रिया में भी शामिल रहे हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मजदूरों और प्रबंधन के बीच हुए समझौतों पर संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर भी हुए हैं।

इसके अतिरिक्त, इन नेताओं ने मजदूरों की जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित धरना-प्रदर्शनों में भागीदारी की है। ऐसे में मजदूरों के बीच मध्यस्थता करने, समझौता प्रक्रिया में शामिल होने और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों में भाग लेने वाले नेताओं के विरुद्ध गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर की कार्रवाई गंभीर सवाल खड़े करती है।

हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में मजदूर लंबे समय से न्यूनतम वेतन, सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों, श्रम कानूनों के पालन और शोषण से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन आंदोलनों में मजदूरों का नेतृत्व करने वाले नेताओं पर मुकदमे दर्ज करना और जिला बदर जैसी दमनात्मक कार्रवाई करना मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

आज सिडकुल सहित देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में स्थायी प्रकृति के कार्यों को ठेका व्यवस्था के तहत कराए जाने, कम वेतन, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों तथा श्रम अधिकारों के उल्लंघन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय मजदूरों और

उनके प्रतिनिधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। मजदूरों को संगठित होने, अपनी मांगें उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा का स्पष्ट मत है कि कानून का इस्तेमाल मजदूरों की आवाज दबाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और न्याय की रक्षा के लिए होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप है, तो उसका निष्पक्ष परीक्षण और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निर्णय होना चाहिए। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संवैधानिक अधिकारों का पालन अनिवार्य है झूठे और फर्जी मुकदमे लगाकर गुंडा एक्ट की कार्यवाही करना किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं है।

मोर्चा मांग करता है कि पंकज बवाड़ी, जय प्रकाश यादव और ललित इंजीनियर के जिला बदर आदेशों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, उन्हें उचित कानूनी राहत प्रदान की जाए तथा मजदूर आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने, श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, हरिद्वार, सभी ट्रेड यूनियनों, मजदूर संगठनों, सामाजिक संगठनों, जनवादी ताकतों और न्यायप्रिय नागरिकों से अपील करता है कि वे मजदूर नेताओं के खिलाफ की गई इस कार्रवाई का लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से विरोध करें। मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और दमनात्मक कार्रवाइयों के खिलाफ एकजुटता दिखाए आज समय की आवश्यकता है।

हमारी मांग स्पष्ट है- मजदूरों पर फर्जी मुकदमे लगाना बंद करो, जिला बदर की कार्रवाई वापस लो और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करो !

यदि हमारी मांगों पर शासन प्रशासन संज्ञान नहीं लेता है तो मोर्चा आगे आंदोलन की रूपरेखा बनाकर आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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