ब्यूरो, कोटा: वैश्विक संस्कृत मन्च राजस्थान प्रान्त के द्वारा राष्ट्रीय ई-संस्कृत संगोष्ठी का आज आयोजन हुआ। संगोष्ठी संयोजक डॉ. भूपेन्द्र कुमार राठौर के अनुसार भारतीय ज्ञान परम्परा में संस्कार विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में का शुभारम्भ डॉ. मेघा शर्मा द्वारा सरस्वती वन्दना से हुआ ।
स्वागत उद्बोधन डॉ. अशोक तंवर शेखावत सह आचार्य राजकीय महाविद्यालय झालावाड़ ने किया । विशिष्ट अतिथि आनन्द शर्मा पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी उज्जैन एक नियन्त्रक परीक्षा भोपाल ने अपने उद्बोधन में बताया कि संस्कार धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं है अपितु व्यक्तित्व है। संस्कार जीवन के लिए आवश्यक है।
मुख्य अतिथि प्रो० (डॉ.) पंकज कुमार मिश्र सेन्ट स्टीफन्स कॉलेज नई दिल्ली संस्कृत विभागाध्यक्ष ने बताया कि संस्कार वर्तमान शिक्षा के लिए आवश्यक है उन्होंने संस्कृत के विविध ग्रन्थों के माध्यम से विषय को स्पष्ट किया है। सारस्वत अतिथि के रूप में प्रो. (डा.) रामदेव साहू जैन विश्व भारती लाडनूं नागौर ने बताया कि संस्कार की अपेक्षा सभी को है किन्तु अपेक्षा कृत संस्कार नहीं मिल रहे हैं इसके पीछे मूल कारण आदर्श का अभाव है।
संस्कार का स्वरूप सभ्यता, संस्कृति का यथार्थ साक्षेप हो। मनुष्य में मानवता का अभाव होगया है। संस्कारो से वसुधैव कुटुम्बकम् का सिध्दान्त भी प्रतिफलित होगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुदेश आहूजा सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने बताया कि संस्कारों की आज महत् आवश्यकता है वर्तमान में हिंसा- लुट् चोरी- हत्या आदि हो रहे है इनमें संस्कारों का अभाव है।
उन्होंने सोलह संस्कारों के विषय संस्कार विधि के माध्यम से बताया । संस्कार ‘मनुर्भव’ का सूचक है। धन्यवाद ज्ञापित एवं शान्ति पाठ डॉ. जुगल किशोर शर्मा प्राचार्य राजकीय उच्च शासकीय विद्यालय घिनोदा मध्य प्रदेश ने किया ।
इस अवसर पर वैश्विक संस्कृत मंच के महासचिव डॉ.राजेश मिश्र संस्कार भारती के महामंत्री देवेंद्र कुमार सक्सेना सहित भारत वर्ष के अनेक विद्वान, शोध छात्र उपस्थित रहे। सभी को मंच द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किये जायेंगे ।


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