संजीव शर्मा एनटीन्यूज़: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयानों और ट्वीट से लग रहा है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस बिखर रही है और वह असहज तथा असहाय महसूस कर रहे हैं।
हरीश रावत ने एक ट्वीट में उन्होंने अपना दर्द बयां किया है। ट्वीट में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस आलाकमान के रवैये पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हरीश रावत ने लिखा है कि चुनाव रूपी समुद्र है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
हरीश रावत ने लिखा कि जिस समुद्र में तैरना है, जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है।
हरीश रावत ने लिखा फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है न दैन्यं न पलायनम् बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया साल शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे। सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं, जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है।


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