“माँ : ममता की मूरत”— प्रिया सिंह
“लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती।”
“चलती-फिरती हुई आँखों से अज़ान देखी है,
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है, माँ देखी है।”
मातृ दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन माँ के प्रेम, त्याग, समर्पण और ममता को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। “माँ” केवल तीन अक्षरों का शब्द नहीं, बल्कि एक पूरा संसार है। यह शब्द अपने भीतर असीम स्नेह, त्याग, सेवा और वात्सल्य समेटे हुए है।
दुनिया के हर रिश्ते में कहीं न कहीं कोई शर्त होती है, लेकिन माँ का प्यार निःस्वार्थ और बेशर्त होता है। वह नौ महीने अपनी कोख में हमें पालती है, अपना रक्त देकर हमें जीवन देती है और जन्म के बाद अपनी हर साँस अपने बच्चों के नाम कर देती है। माँ हमारे जीवन की पहली गुरु होती है, जो हमें बोलना, चलना, खाना और अच्छे संस्कार सिखाती है। वह बिना किसी अपेक्षा के अपने बच्चों की खुशियों के लिए हर कठिनाई सह लेती है, लेकिन कभी शिकायत नहीं करती।
जब हम दुखी होते हैं, तब माँ हमें हिम्मत देती है और सही मार्ग दिखाती है। उसकी गोद दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है। यही कारण है कि कहा जाता है— “माँ भगवान का दूसरा रूप होती है।”
आज के व्यस्त जीवन में लोग कई बार अपनी माँ के लिए समय नहीं निकाल पाते, जबकि बच्चे का पहला शब्द ही “माँ” होता है। रिश्तों की समझ, इंसानियत का पाठ और जीवन की पहली सीख हमें माँ से ही मिलती है। जब पूरी दुनिया हमें डाँटती है, तब माँ हमें समझाती है। जब हम गिरते हैं, तो माँ बिना आवाज़ किए हमें उठाती है।
मातृ दिवस का उद्देश्य केवल उपहार देना नहीं, बल्कि माँ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है। इस दिन लोग अपनी माँ को शुभकामनाएँ देते हैं, उपहार भेंट करते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं। विद्यालयों एवं सामाजिक संस्थाओं में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर माँ के महत्व को बताया जाता है।
मातृ दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमें केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन अपनी माँ का सम्मान करना चाहिए और उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। माँ का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, क्योंकि उसका त्याग अमूल्य होता है। माँ हमारे जीवन की सबसे अनमोल धरोहर है।
दुनिया की सभी माताओं को सादर वंदन एवं शत-शत प्रणाम।
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संजीव शर्मा
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