February 8, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

कांग्रेस और राहुल गाँधी के चीन में हुए समझौते पर संसद में हो चर्चा एवं जांच– अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 8 फरवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविंद सिसोदिया ने लोकसभा में हाल ही में हुए दुर्भाग्यापूर्ण घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ” संसद में किया गया सुनियोजित हंगामा, अव्यवस्थित गतिविधियाँ, भ्रामक नारेबाज़ी तथा प्रधानमंत्री की कुर्सी को संसदीय मर्यादा भंग करते हुए घेरे में लेना, संसदीय परंपराओं के विपरीत है और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है।

सिसोदिया ने कहा कि ” संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संस्था है, जिसे जनता अपने मताधिकार से गठित करती है। यह वह मंच है जहाँ देश के नियम, कानून और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा और समाधान होता है। विपक्ष का दायित्व है कि वह तथ्यों और तर्कों के आधार पर अपनी बात सदन में रखे, न कि सुनियोजित ढंग से कार्यवाहीयां बाधित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को विफल करे।

उन्होंने कहा कि ” यह तथ्य कथित माध्यमों से सर्वविदित है कि वर्ष 2008 में कांग्रेस पार्टी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता चीन में हुआ था, जिसके चित्र विभिन्न माध्यमों में गूगल आदि पर उपलब्ध रहे हैं। ऐसे में इस विषय पर संसद और संसद के बाहर खुली, पारदर्शी और तथ्यात्मक चर्चा होना अत्यंत आवश्यक है। देश यह जानना चाहता है कि कांग्रेस और राहुल गाँधी ने चीन में किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और उनका भारत के राष्ट्रीय हितों पर क्या प्रभाव पड़ा।

अरविंद सिसोदिया ने कहा कि ” कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उस समझौते की प्रकृति क्या थी, उसके उद्देश्य क्या थे और उससे भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं हो रहा है । ” उन्होंने ” इस विषय की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि संपूर्ण सत्य सामने आ सके।

सिसोदिया ने कहा कि ” भारतीय संविधान की भावना यह है कि देश की शासन व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया पूर्णतः राष्ट्रहित के प्रति निष्ठावान हो। यदि किसी राजनीतिक दल के विदेशी राजनीतिक संगठनों से संबंधों को लेकर प्रश्न उठते हैं, तो उनका उत्तर पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ” कांग्रेस बार-बार यह साबित कर चुकी है कि वह स्वयं को भारत की जनता के निर्णय से ऊपर समझती है। पूर्व में अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी के साथ किया गया व्यवहार इसकी तानाशाही मानसिकता का उदाहरण है। यही मानसिकता आज संसद की कार्यवाही में भी दिखाई दे रही है, जिसे देश कतई स्वीकार नहीं करता है । संसद को बाधित करना, देश की छवि धूमिल करना और विदेशी ताकतों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाना कांग्रेस की आदत बनती जा रही है।

अंत में सिसोदिया ने कहा कि ” भारत की जनता देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सम्मान से जुड़े हर विषय पर अत्यंत संवेदनशील है और पूर्ण स्पष्टता चाहती है। किसी भी राजनीतिक दल द्वारा शत्रु राष्ट्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाने जैसी संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

अरविंद सिसोदिया

शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी

राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल

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