September 28, 2026

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उत्तरांचल (पर्वतीय) कर्मचारी-शिक्षक संगठन ने सेवारत शिक्षकों के लिए उठाई टीईटी के मानकों में बदलाव की मांग

हरिद्वार:  उत्तरांचल (पर्वतीय) कर्मचारी-शिक्षक संगठन, जनपद शाखा हरिद्वार ने राज्य में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (U.T.E.T.) में न्यूनतम अर्हता 40 प्रतिशत (60 अंक) निर्धारित किए जाने तथा सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक U.T.E.T. परीक्षा वर्ष 2026 से ही आयोजित किए जाने की मांग प्रदेश संगठन के समक्ष रखी है।

संगठन ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में न्यूनतम अर्हता के मानकों में अंतर है। उत्तराखंड बोर्ड द्वारा आयोजित U.T.E.T. में विभिन्न वर्गों के लिए न्यूनतम अर्हता 60 प्रतिशत (90 अंक), 50 प्रतिशत (75 अंक) एवं 40 प्रतिशत (60 अंक) निर्धारित है। वहीं सेवारत शिक्षकों के संदर्भ में भी अलग-अलग अर्हता मानक लागू होने से शिक्षकों में असमानता की स्थिति उत्पन्न होती है।

संगठन का कहना है कि समान सेवा परिस्थितियों में कार्यरत सभी सेवारत शिक्षकों के लिए U.T.E.T. में न्यूनतम अर्हता एक समान 40 प्रतिशत (60 अंक) निर्धारित की जानी चाहिए।

संगठन ने यह भी कहा कि राज्य के माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव को शीघ्र अमलीजामा पहनाते हुए वर्ष 2026 से ही सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक TET परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए, जिससे सेवारत शिक्षकों को पात्रता प्राप्त करने का समयबद्ध अवसर मिल सके और वर्तमान असमंजस की स्थिति समाप्त हो।

जिलाध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने कहा कि “वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो उनकी सेवा अवधि और अनुभव को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत एवं व्यावहारिक हो। सभी सेवारत शिक्षकों के लिए 40 प्रतिशत (60 अंक) की समान न्यूनतम अर्हता निर्धारित करना आवश्यक है। साथ ही माननीय शिक्षा मंत्री जी द्वारा प्रस्तावित पृथक TET परीक्षा को वर्ष 2026 से ही आयोजित किया जाना चाहिए।”

जिला महामंत्री अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि “सेवारत शिक्षकों को अलग-अलग अर्हता मानकों के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। संगठन की स्पष्ट मांग है कि सेवारत शिक्षकों के लिए न्यूनतम अर्हता 40 प्रतिशत निर्धारित की जाए तथा उनके लिए पृथक TET परीक्षा वर्ष 2026 से प्रारंभ की जाए। प्रदेश संगठन से अपेक्षा है कि वह इस मांग को शासन एवं शिक्षा विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएगा।”

संगठन ने प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंत्री से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण विषय को प्रदेश स्तर पर प्राथमिकता से उठाते हुए उत्तराखंड शासन एवं शिक्षा विभाग से आवश्यक कार्यवाही कराई जाए तथा सेवारत शिक्षकों के लिए वर्ष 2026 से पृथक U.T.E.T. परीक्षा एवं 40 प्रतिशत न्यूनतम अर्हता लागू कराने के लिए प्रभावी पैरवी की जाए।

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