26 वें कारगिल दिवस के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय पाबौ, पौड़ी गढ़वाल में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य कारगिल युद्ध के शहीदों को याद करते हुए उनके अदम्य साहस एवं शौर्य को स्मरण करना था।
कार्यक्रम का आरंभ राजनीति विज्ञान की प्राध्यापिका सुनीता चौहान द्वारा किया गया।
उन्होंने 1999 में पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई घुसपैठ और ऑपरेशन विजय पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। माखनलाल चतुर्वेदी की कविता ‘पुष्प की चाह’ का उद्धबोधन करते हुए सभी को देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने का आह्वान किया।
इसी क्रम में डॉ. सरिता द्वारा अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कविता प्रस्तुत की गई । डॉ. सौरभ सिंह ने भी विक्रम बत्रा के अदम्य साहस और शौर्य को सबके सामने रखा।
संगोष्ठी के अंत में संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सत्यप्रकाश शर्मा ने कारगिल युद्ध की संपूर्ण पृष्ठभूमि को सबके सामने रखा। उन्होंने वीर सपूतों को याद करते हुए उन्हें हिंदी साहित्य में देशभक्ति पर लिखी रचनाओं के द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा एवं निर्वहन को भी उन्होंने देशभक्ति का आधार माना।
उन्होंने कहा की कारगिल युद्ध केवल सीमा पर नहीं अपितु सीमाओं के अंदर सभी भारतीयों द्वारा लड़ा गया तभी ऑपरेशन विजय सफल हो सका।
संगोष्ठी में महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।



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