September 3, 2026

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देहरादून- राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्य पदार्थों की पोषण में भूमिका पर विशेष व्याख्यान

देहरादून:  राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मालदेवता, रायपुर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अंतर्गत “उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्य पदार्थ: पोषण, स्वास्थ्य एवं बदलती जीवनशैली में उनकी प्रासंगिकता” विषय पर विशेष व्याख्यान एवं “स्वस्थ आहार एवं संतुलित पोषण” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. डिम्पल भट्ट के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग होने के साथ-साथ पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत को समझने, उसे दैनिक आहार में स्थान देने तथा समुदाय में स्वस्थ एवं संतुलित भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. वी. पी. अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड में उपलब्ध स्थानीय खाद्य संसाधनों एवं पारंपरिक खान-पान की पोषण संबंधी उपयोगिता को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाने तथा पोषण संबंधी ज्ञान को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य वक्ता डॉ. सोनी तिलारा, विभागाध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग, धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय, नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल ने उत्तराखंड के पारंपरिक आहार की पोषण संबंधी विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, स्थानीय दालों, अनाजों एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के महत्व को बताते हुए कहा कि ये खाद्य पदार्थ पोषक तत्त्वों से भरपूर होने के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल भी हैं।

उन्होंने पारंपरिक भोजन पद्धतियों को संरक्षित करने, स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में सम्मिलित करने तथा जंक फूड एवं अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम करने पर विशेष बल दिया।
इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वस्थ आहार, संतुलित पोषण एवं बेहतर जीवनशैली का प्रभावशाली संदेश दिया।

विभागीय प्राध्यापिका श्रीमती पूजा रानी ने कहा कि स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अपनाना केवल बेहतर पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी खाद्य विरासत के संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पोषण संबंधी समझ से जोड़कर समाज में स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने मुख्य वक्ता, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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