September 20, 2026

Naval Times News

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राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ के छात्र-छात्राओं का देवलसारी में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण 

चिन्यालीसौड़: आज दिनांक 26 अप्रैल 2026 को राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी के बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर वनस्पति विज्ञान के छात्र-छात्राओं को एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर वनस्पति विज्ञान के विभाग प्रभारी डॉ अशोक कुमार अग्रवाल के निर्देशन में देवलसारी ले जाया गया।

इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण के लिए शुभकामनाएं दी।

शैक्षणिक भ्रमण के आयोजक डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि देवलसारी टिहरी जनपद में टिहरी – मसूरी मार्ग पर करीब 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। देवलसारी अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और यह क्षेत्र करीब 30 किलोमीटर के दायरे में फैला है।

मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किमी पैदल चलकर इस जैव विविधता स्थल की शुरुआत होती है, यह पहला ऐसा पर्यटक स्थल है जहां जाकर पर्यटक और प्रकृति प्रेमी जैव विविधता और प्रकृति दोनों को एक साथ नजदीक से महसूस कर सकते हैं ।

यहां पर विभिन्न प्रकार की वनस्पति प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जिनमें प्रमुख रूप से विभिन्न प्रकार के ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म ऑर्किड, एपिफाइट्स, बराबरी की झाड़ियां, ओक, बुराश और देवदार प्रमुख है।

देवलसारी की पहचान दिलाने और यहां की जैव विविधता को सुरक्षित रखने में देवलसारी पर्यावरण एवं विकास संस्थान ने मुख्य भूमिका निभाई है, इस स्थान के निदेशक श्री अरुण प्रसाद ने हमारे निवेदन पर पूरे समय हमारे साथ रहे और देवलसारी की जैव विविधता के बारे में छात्र-छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी साथ ही वन विभाग के उप वन क्षेत्रपाल वन विभाग द्वारा विकसित पार्क में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों, तितलियों वन्यजीवों के विषय में छात्र-छात्राओं को विस्तार से बताया।

यहां पर छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने स्वच्छता अभियान के माध्यम से पानी और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतल, चिप्स ट्रॉफी और चॉकलेट के रैपर आदि इकट्ठा कर वन विभाग के सुपुर्द किया।

जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध यह पर्यटक स्थल शोध के लिए भी महत्वपूर्ण है। देवलसारी क्षेत्र को उत्तराखंड का पहला जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किए जाने की प्रबल संभावना है, इस दिशा में निरंतर कार्य चल रहा है।

इस भ्रमण कार्यक्रम को सफल बनाने मे प्राध्यापिका डॉ निशी दुबे और आराधना राठौर ने पूर्ण रूप से सहयोग किया।

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